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मानवी विद्युत इस जगत की प्रचण्डतम ऊर्जा
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AJH1978Jan_4
#मानवी
#विद्युत
#जगत
मानवी विद्युत इस जगत की प्रचण्डतम ऊर्जा Document
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Topic Of Source Title
अन्तर्जगत का देवासुर संग्राम_अनिर्णीत ही न चलता रहे_AJH1978Jan
जीवन ईश्वर का स्वरूप एवं वरदान
भक्ति मार्ग और प्रेम योग
बन्धन मुक्ति ईश्वर प्राप्ति
मानवी विद्युत इस जगत की प्रचण्डतम ऊर्जा
बीस अरब पृष्ठों की पुस्तक
अन्तःकरण चतुष्टय और साधना विज्ञान
ध्यान साधना की प्रचण्ड सामर्थ्य
ज्ञान ही नहीं मनुष्य को धर्म भी चाहिए
हंसती-हंसाती हलकी फुलकी जिन्दगी
ऊँट के नीचे पहाड़
उधर जाइये मत खतरा है!
धर्म अफीम की गोली नहीं हैं !
पारिवारिक जीवन में निष्ठा और भावनाएँ जमी रहें!
हम विराट विश्वात्मा के एक घटक मात्र हैं।
सादगी अपनायें शालीनता बरतें!
एकांगी प्रगति- कानी कुबड़ी लंगड़ी लूली
हमारी कमाई में पिछड़ों का भी हिस्सा है!
प्रगति का एकमेव आधार-प्रतिभा, सहकार
जैसा खाये अन्न- वैसा बने मन
भविष्य वाणियों से सार्थक दिशाबोध
संकटों से छुटकारा विवेक ही दिला सकेगा
॥ अथ श्री माल्थस सिद्धान्त प्रारभ्यते ॥
मानसिक रोगों का प्रेमोपचार
महामानव के पक्षधर बनें या अतिमानव के
अपनों से अपनी बात-अन्तर्जगत का देवासुर संग्राम-अनिर्णीत ही न चलता रहे (लेख शृंखला)
अमृत-पुत्र (कविता)
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